खून पतला करने वाली दवा हुई सस्ती

Diabetes and heart disease drugs are going to be more cheaper

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Medicine
Picture: Pixabay

Last Updated on November 4, 2020 by The Health Master

ग्वालियर। डायबिटीज और हार्ट पेशेंट को जिन दवाओं के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ते थे, वह अब उन्हें कम कीमत में मिलेंगी। इसका कारण यह है कि डायबिटीज और हार्ट संबंधी बीमारी की दवा बनाने वाली विदेशी कंपनियों का पेटेंट समाप्त हो गया है।

पेटेंट समाप्त होने से अब भारतीय दवा कंपनियों ने सस्ती जेनेरिक दवाएं बाजार में उतार दी हैं। डायबिटीज की दवा बिडाग्लेप्टिन (प्रति खुराक) जो करीब 20 से 25 रुपए में आती थी, वह घटकर अब 5 से 6 रुपए हो गई है।

इससे शहर के हजारों डायबिटीज के मरीजों को राहत मिलेगी। इसी तरह हृदय रोगियों की खून पतला करने की प्रमुख दवा टीकाग्रेलोर की कीमत 55 रुपए से घटकर महज 12 रुपए तक आ गई है।

इन दवाओं की कीमत पहले ही करीब 80 फीसदी घट चुकी है। राहत वाली बात यह भी है कि डायबिटीज की कुछ और दवाओं का पेटेंट अगले दो-चार साल में खत्म होने जा रहा है।


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इस साल मधुमेह और हृदय से संबंधित तीन प्रमुख बीमारियों की दवाओं का पेटेंट खत्म हो गया है और घरेलू कंपनियों ने बाजार में मूल दवाओं के सस्ते जेनेरिक संस्करण उतारे हैं। इन दवाओं की कीमतें पहले ही करीब 80 फीसदी घट चुकी हैं।

स्विटजरलैंड की बहुराष्ट्रीय कंपनी नोवार्तिस की गैल्वस (बिडाग्लेप्टिन) का पेटेंट दिसंबर में खत्म हो गया है। डायबिटीज के मरीजों को रोजाना दो खुराक लेनी पड़ती है। अब मरीजों का खर्चा कम होगा।

टीकाग्रेलोर उन मरीजों को खाने की सलाह दी जाती है, जिन्हें हृदय से संबंधित बीमारी रही है ताकि दिल के दौरे के आसार कम किए जा सकें। यह दवा रक्त के थक्कों को भी कम करती है।

टीकाग्रेलोर की कीमत करीब 55 रुपये प्रति खुराक है, लेकिन अब कीमत 12 रुपए तक आ गई है। इस दवा की औसत कीमत 20 रुपये प्रति खुराक है।


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