दवाओं की आनलाइन ट्रेडिंग है खतरनाक

Online trading of drugs is dangerous

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Medicine online
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दवाओं की आनलाइन ट्रेडिंग है खतरनाक

गोरखपुर: दवाओं का एक बड़ा बाजार आनलाइन चल रहा है। न फार्मासिस्ट की जरूरत है न डाक्टर की। नारकोटिक्स की भी दवाएं पर्याप्त मात्रा में खरीदने के अवसर उपलब्ध हैं। जबकि इन दवाओं को डाक्टर के ही पर्चे पर देने का नियम है।

हद तो तब हो गई जब वैक्सीन अभी आई नहीं और डार्क बेवसाइटें धड़ल्ले से बेचने लगी हैं। दवा व्यापारियों का कहना है कि दवाओं की आनलाइन ट्रेडिंग ही खतरनाक है। इस पर रोक लगनी चाहिए।

C-19 टीकाकरण की तैयारी चल रही है। प्रथम चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन लगाई जानी है। दूसरे चरण में 60 वर्ष से ऊपर के लोग, तीसरे चरण में 60 वर्ष से नीचे लोग जो बीमार होंगे, चतुर्थ चरण में आम जन को यह वैक्सीन लगाई जाएगी।

Medicine Injection Vaccine
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सरकारी स्तर पर आम जन को बाद में वैक्सीन लगाई जानी है, इसका फायदा जालसाज उठा रहे हैं और डार्क वेबसाइटों पर धड़ल्ले से बेच रहे हैं। अनेक वेबसाइटें पैसे लेने के बाद चंपत हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी वेबसाइटों से सावधान रहने को कहा है।


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सीएमओ डा. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि इन वेबसाइटों से ठगे जाने का खतरा है। इसलिए कहीं भी संदेह होने पर स्वास्थ्य विभाग से परामर्श जरूर लें। दवा व्यापारियों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि हर हाल में दवा का आनलाइन कारोबार बंद होना चाहिए।

दवा दुकानों पर फार्मासिस्ट का होना जरूरी है, जबकि आनलाइन हम किससे दवा खरीद रहे हैं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं होती। इस माध्यम का फायदा जालसाज भी उठा रहे हैं। C-19 वैक्सीन अभी आई नहीं और जालसाज इसे आनलाइन बेचना शुरू कर दिए हैं।

क्‍या कहते हैं दवा विक्रेता

दवा विक्रेता समि‍ति के महामंत्री आलोक चौरसिया का कहना है कि मानसिक व अवसाद की दवाएं दुकानदार सिर्फ डाक्टर के पर्चे पर ही देता है, उतनी ही देता है, जितने दिन के लिए डाक्टर ने लिखा है। लेकिन आनलाइन चाहे जितनी दवाएं मंगाई जा सकती हैं।

इसका इस्तेमाल लोग नशे के लिए करते हैं। इसलिए आनलाइन ट्रेडिंग ही खतरनाक है। पूर्णतया अवैध है, यह बंद होनी चाहिए। वहीं केमिस्‍ट एंड ड्रगिस्‍ट एसोएिसशन के महामंत्री दिलीप सिंह का कहना है कि दवा दुकानदार को ड्रग लाइसेंस लेना पड़ता है।

दुकान पर फार्मासिस्ट का होना अनिवार्य है। लेकिन आनलाइन कारोबार वाले न तो लाइसेंस लेते हैं और न ही वहां बेचने वाले फार्मासिस्ट होते हैं। इसलिए ऐसे कारोबारी ड्रग विभाग की पकड़ से भी दूर होते हैं। अब वैक्सीन बेचने से बड़ी जालसाजी क्या हो सकती है। इसपर रोक लगनी चाहिए।


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