Medicine की गोली से मिल सकेगा exercise जितना फायदा: Study

अब साइंटिस्टों ने एक ऐसी गोली इजाद की है, जिसको खाने से एक्सरसाइज जितना फायदा मिलेगा.

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Picture: Pixabay

Last Updated on December 10, 2021 by The Health Master

Medicine की गोली से मिल सकेगा exercise जितना फायदा

आजकल की लाइफस्टाइल में सेहत का ख्याल नहीं रखने पर कई बीमारियां घर कर जाती है. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज तो पूरी तरह से हमारी खानपान की आदतों और आलस्य से भरी जीवनशैली की वजह से हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं.

इसीलिए डॉक्टर हमेशा से नियमित डाइट और रेगुलर एक्सरसाइज की सलाह देते हैं. अगर हम अपने खाने और व्यायाम की आदतों को ठीक कर लें तो कई तरह की हार्ट और ब्रेन डिजीज से दूर रह सकते हैं.

लेकिन कई लोगों के लिए एक्सरसाइज (Exercise) का नियम निभाना का काफी मुश्किल हो जाता है. कुछ बीमार लोग और बुजुर्ग गिरती सेहत की वजह से रेगुलर एक्सरसाइज नहीं कर पाते हैं.

जिसकी वजह से व्यायाम का सेहत पर जो असर होना चाहिए, वो नहीं हो पाता है. ऐसे ही लोगों के लिए साइंटिस्टों की एक अनोखी खोज खुशी देने वाली साबित हो सकती है.

अब साइंटिस्टों ने एक ऐसी गोली इजाद की है, जिसको खाने से एक्सरसाइज जितना फायदा मिलेगा.

साइंस डेली (Science Daily) की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स ने एक मॉलीक्यूलर सिग्नल की खोज की है, जो दवा की गोली (Medicine Pill) के रूप में वैसा ही न्यूरोलॉजिकल (Neurological) फायदा पहुंचाएगा जैसा कि एक्सरसाइज करने से होता है.

एएनयू (ANU) यानी ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (Australian National University)  द्वारा की गई इस स्टडी  के रिसर्चर्स का कहना है, ‘हमें उम्मीद है कि इस खोज से साइंटिस्ट एक्सरसाइज का फायदा गोली (Pill) से भी दे पाएंगे.’

क्या कहते हैं जानकार

एनएयू के एसोसिएट प्रोफेसर और क्लियर विजन रिसर्च के प्रमुख  रिकार्डो नटोली (Riccardo Natoli)का कहना है कि इसे विटामिन की गोली (vitamin tablet) की तरह लिया जा सकेगा, जो एक्सरसाइज के टाइम मिलने वाला मॉलीक्यूलर मैसेज देगा.

इससे उन लोगों को फायदा होगा, जो एक्सरसाइज करने में शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हैं. इसके साथ ही इससे अल्जाइमर और पार्किंसंस (Alzheimer’s and Parkinson’s) जैसे रोगों से ग्रस्त लोगों को यह फायदा भी होगा कि उनमें रोग बढ़ने की गति धीमी हो जाएगी.

कैसे आता है सुधार

रिसर्चर्स का कहना है कि हमें यह पता है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हमारे न्यूरॉन कमजोर होने लगते हैं लेकिन जब हम मॉलीक्यूलर मैसेज भेजते हैं, तो न्यूरॉन की स्थिति में सुधार आ सकता है.

इस बात के काफी सारे सबूत हैं कि अल्जाइमर और पार्किंसंस (Alzheimer’s and Parkinson’s) ग्रस्त लोगों में एक्सरसाइज से मेमोरी पावर और मोटर कोआर्डिनेशन में सुधार आता है.

केवल कुछ लोगों के लिए ही उपलब्ध हो दवा

रिसर्चर्स ने इसके साथ ही चेताया भी है कि भविष्य में यदि इस प्रकार कोई दवा (गोली) बनाई जाती है, तो उसे आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाना चाहिए.

बल्कि उसे ऐसे रोगियों के लिए ही रिजर्व रखा जाना चाहिए, जिनका चलना-फिरना बहुत कम हो पाता है.

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