Covid-19:वैज्ञानिकों ने नई तकनीक विकसित की जो 36 मिनट में देगी रिपोर्ट

Covid-19: Scientists developed new technique which will give result in 36 minutes

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Laboratory
Picture: Pixabay
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नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। कोरोनावायरस हमारे बीच पलने वाला ऐसा वायरस है जिससे बचाव करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस वायरस का खात्मा करना है तो ज्यादा से ज्यादा लोगों के टेस्ट करके उन्हें आइसोलेट करना ही सबसे बड़ा उपचार है। लेकिन अभी तक टेस्ट की जिस प्रणाली का इस्तेमाल हो रहा है वो बहुत ज्यादा समय लेती है साथ ही उस टेस्ट को करने के लिए प्रोफेशनल लोगों की ही जरूरत होती है। टेस्ट प्रणाली की पेचीदगी को देखते हुए वैज्ञानिक लगातार प्रयासरत है।

अब सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे प्रयोगशाला में होने वाली कोविड-19 की जांच के नतीजे केवल 36 मिनट में ही आ जाएंगे। मौजूदा समय में जिस जांच प्रणाली का इस्तेमाल हो रहा है उसे करने के लिए उच्च प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होती है, और नतीजे आने में कई घंटे लगते हैं।

विश्विवद्यालय ने सोमवार को कहा कि नई तकनीक नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीसी) के ली कॉंग चियान स्कूल ऑफ मेडिसिन में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई है। इस नई तकनीक में कोविड-19 की प्रयोगशाला जांच में लगने वाले समय और लागत में सुधार के तरीके सुझाए गए हैं।

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उसने कहा कि परीक्षण, जिसे पोर्टेबल उपकरणों के साथ किया जा सकता है, उसे समुदाय में एक ‘स्क्रीनिंग टूल’ के रूप में भी तैनात किया जा सकता है। उसने कहा कि नई तकनीक से कोविड-19 की प्रयोगशाला जांच की रिपोर्ट 36 मिनट में आ सकती है। वर्तमान में, कोविड-19 परीक्षण के लिए सबसे संवेदनशील तरीका पोलीमरेज़ चैन रिएक्शन (पीसीआर) नामक एक प्रयोगशाला तकनीक है, जिसमें एक मशीन वायरल आनुवंशिक कणों को बार-बार कॉपी करके उसकी जांच करती है ताकि सार्स-सीओवी-2 वायरस के किसी भी लक्षण का पता लगाया जा सकता है।

साथ ही आरएनए की जांच में सबसे अधिक समय लगता है, जिसमें रोगी के नमूने में अन्य घटकों से आरएनए को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया में जिन रसायनों की आवश्यकता होती है उसकी आपूर्ति दुनिया में कम है। ‘एनटीयू एलकेसीमेडिसन’ द्वारा विकसित नई तकनीक कई चरणों को एक-दूसरे से जोड़ती है और इससे मरीज के नमूने की सीधी जांच की जा सकती है। यह नतीजे आने के समय को कम और आरएनए शोधन रसायनों की जरूरत को खत्म करती है। इस नई तकनीक की विस्तृत जानकारियों वैज्ञानिक पत्रिका ‘जीन्स’ में प्रकाशित की गई है। 

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